अब की बार 5 मास का होगा चातुर्मास :–धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़ सर्वोदय सद्भावना संस्थान द्वारा रामानुज आश्रम में श्री हरि शयनी एकादशी धूमधाम से मनाई गई। प्रातः काल शालिग्राम में विराजित भगवान श्री हरि जगन्नाथ जी नृसिंह भगवान एवं शेष भगवान का दूध दही घी शक्कर मधु एवं गंगाजल से अभिषेक हुआ। पूजन अर्चन के पश्चात धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने श्री हरि शयनी एकादशी के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि यह पुण्य मई एकादशी स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करने वाली सब पापों को हरने वाली उत्तम एकादशी है। जिसने आज भगवान श्री विष्णु का पूजन तथा एकादशी का व्रत किया उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओं का पूजन कर लिया। आज से भगवान श्री हरि एक स्वरूप में क्षीर सागर में तथा दूसरे स्वरूप में राजा बलि के यहां शयन करते हैं। आगामी कार्तिक मास की देव शयनी एकादशी के दिन भगवान अब योग निद्रा से उठेंगे।
आज से चातुर्मास लग गया। अबकी बार चातुर्मास 148 दिन का होगा जो 5 महीने का होगा इसी बीच आश्विन मास में 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास या पुरुषोत्तम मास लगेगा ।25 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को चातुर्मास की समाप्ति होगी। है
ज्योतिष गणना के अनुसार इसके पूर्व 19 वर्ष पूर्व 2001 में आश्विन मास में अधिक मास पड़ा था।अब आश्विन मास में अगला पुरुषोत्तम मास 2039 में आएगा। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का तथा चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। इस प्रकार दोनों दिवशों के बीच करीब 11 दिन का अंतर होता है ,जो प्रत्येक 3 वर्ष बाद एक महीने के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पूरा करने के लिए हर 3 वर्ष में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, और इस अतिरिक्त होने के कारण अधिवास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। 2020 में दो आश्विन मास पड़ेंगे इसलिए आश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा इसी के मध्य 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिमास रहेगा।
इस कारण 17 अक्टूबर से नवरात्रि मनाई जाएगी तथा दीपावली आदि त्योहारों नवरात्र दशहरा 20 से 25 दिन बाद आएंगे। नवरात्रि एवं श्राद्ध पक्ष में लगभग एक माह का अंतर होगा। दशहरा 26 अक्टूबर और दीपावली 14 नवंबर तथा देव प्रबोधनी एकादशी 25 नवंबर को मनाई जाएगी ।
चातुर्मास में सावन में साग हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन मास में दूध तथा कार्तिक में दाल नहीं खाना चाहिए। कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। मांस मदिरा लहसुन प्याज का सेवन वर्जित है।
भगवान श्री विष्णु की आराधना करना चाहिए। ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए। भगवान की कथाओं का श्रवण करने तथा श्री विष्णु सहस्रनाम श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने से अत्यधिक पुण्य का लाभ होता है।

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