अहिल्याबाई होलकर मालवा साम्राज्य की शशक्त महिला शासक थी

अहिल्याबाई होलकर मालवा साम्राज्य की प्रमुख महिला शासक थीं

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन का आगामी महाधारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई, 4 जनवरी से शुरू हो रहा है, जो आपके नए साल की एक प्रेरणादायक शुरूआत करेगा। अहिल्याबाई होलकर मालवा साम्राज्य की प्रमुख महिला शासक थीं और उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे कुशल महिला शासकों में से एक माना जाता है। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई एक महान औरत के सफर की कहानी है, जिसने अपने ससुर मल्हार राव होलकर के बिना शर्त, अटल समर्थन के साथ पुरुषवादी समाज के रूढ़िवादी बंधनों का सामना किया था।

अहिल्याबाई ने यह साबित किया था कि कोई भी लिंग या जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई का प्रीमियर 4 जनवरी को होने जा रहा है और इसका प्रसारण हर सोमवार से शुक्रवार शाम 7:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर होगा। इस शो में अहिल्याबाई की भूमिका निभा रहीं बाल कलाकार अदिति जलतारे ने इस शो में काम करने के अपने अनुभव बताए। प्रस्तुत है इस चर्चा के कुछ अंश-

सवाल- अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

जवाब– मैं अहिल्याबाई होलकर का किरदार निभा रही हूं जिनके जिज्ञासु मन में कई सवाल थे। दुनिया को देखने का उनका अनोखा नजरिया था, जो उनकी उम्र के बाकी बच्चों से बहुत अलग था। इतनी कम उम्र में भी उन्होंने उन रीति-रिवाजों और मान्यताओं पर सवाल उठाए, जो उन्हें गलत लगते थे। निजी तौर पर मुझे लगता है कि वो अपने वक्त से कहीं आगे की औरत थीं। मैं यह किरदार निभाते हुए बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं। इसमें हर दिन सीखने के लिए बहुत कुछ है। यह सही मायनों में प्रेरणादायक किरदार है।

सवाल – आप इस शो में यंग अहिल्याबाई का रोल निभा रही हैं। आपने इस रोल की तैयारी कैसे की?

जवाब– जब मुझे इस रोल के लिए चुना गया, तो मैंने अहिल्याबाई होलकर के बारे में आनलाइन पढ़ना शुरू किया। मैं जितना पढ़ती गई, उतना उनके विचारों से जुड़ती गई। मेरी मां मुझे बार-बार यह याद दिलाती रहीं कि जो भी मैं पढ़ रही हूं, वो 18वीं शताब्दी यानी आज से 300 साल पहले अहिल्याबाई की विचारधारा थी। उस दौर को बेहतर ढंग से समझने और अपने-अपने किरदारों में उतरने के लिए सभी कलाकारों को अपनी बोली, हाव भाव आदि के लिए वर्कशॉप करनी पड़ी।

हम सभी कलाकारों की साथ में बैठकें भी होती थीं ताकि हम एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकें। इस शो के लेखक हमें अहिल्याबाई के बचपन की कहानी सुनाते थे और मुझे उनके ससुर के साथ उनके तालमेल के बारे में समझाते थे कि उन दोनों के बीच कितना विश्वास था। इन सभी गतिविधियों ने इस किरदार की तैयारी में मेरी काफी मदद की।

सवाल- अपने किरदार में ढलने में आपको कितना समय लगा?

जवाब– सच कहूं तो मैं उनसे कई तरह से जुड़ सकी। मेरी मां ने मेरी और अहिल्याबाई की कुछ समानताओं के बारे में बताया। मैं बहुत से सवाल पूछती हूं क्योंकि मैं ज्यादा से ज्यादा जानना और सीखना चाहती हूं। मैं भी उनकी तरह जानवरों से प्यार करती हूं। मैं भी दूसरों का सम्मान और उनकी मदद करती हूं। एक किरदार के रूप में उन्हें समझना मेरे लिए बहुत मुश्किल नहीं था। हालांकि मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि 300 साल पहले की किसी ऐतिहासिक हस्ती की इस तरह की सोच थी! मुझे अपनी बोली और बॉडी लैंग्वेज पर वाकई बहुत काम करना पड़ा। इसके अलावा मुझे इस किरदार में ढलने में ज्यादा समय नहीं लगा।

सवाल- आपको अपने किरदार की सबसे अच्छी बात क्या लगी?

जवाब– मुझे इस बात ने बहुत प्रेरित किया कि आप अपने कर्मों से महान होते हैं ना कि लिंग या जन्म से। अहिल्याबाई होलकर अपने वक्त से बहुत आगे की महिला थीं। वो एक दूरदर्शी थीं और उन्हें पता था कि वो आज जो बदलाव लाएंगी, उससे आने वाली कई पीढ़ियों पर असर पड़ेगा। अपने बचपन से ही उन्होंने पुरुषवादी समाज पर सवाल उठाए, हालांकि उन्होंने कभी किसी का अपमान नहीं किया। अपने ससुर के सहयोग से वो तमाम मुश्किलों से लड़ीं और समाज की भलाई के लिए बेहद जरूरी बदलाव लाईं।

सवाल – क्या अपने रोल के तैयारी के लिए आपको किसी तरह का शारीरिक प्रशिक्षण लेना पड़ा?

जवाब– यह शो उन्हें वीरांगना के रूप में कम ही दिखाएगा और उनके धारा बदलने वाले कर्मों पर ज्यादा केंद्रित रहेगा। तो ऐसे में मुझे इस रोल की तैयारी के लिए कोई खास शारीरिक प्रशिक्षण नहीं लेना पड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *