Coronavirus: जानें किस देश ने अब तक नहीं लगाई कोई पाबंदी, 9500 से ज्‍यादा लोग हो चुके हैं संक्रमित

पूरा यूरोप कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप से परेशान है. वहीं, यूरोपीय देश बेलारूस (Belarus) में अब तक कोई पाबंदी नहीं लगाई गई. राष्ट्रपति अलेक्जेंडर जी. लुकाशेन्को (Aleksandr G. Lukashenko) यहां तक कह चुके हैं कि बेलारूस में कोई वायरस नहीं है.

कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है. अब तक दुनियाभर में 28,74,660 लोग संक्रमित (Infected) हो चुके हैं. इनमें से 2,00,812 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 8,23,360 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं. इस बीच हर देश संक्रमण फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए हर तरह के उपाय कर रहा है. लोगों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं. ज्‍यादातर देशों ने लॉकडाउन (Lockdown) का सहारा लिया है. इस बीच संक्रमित लोगों की टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट (TTT) पर जोर दिया जा रहा है. अमेरिका (US) के बाद यूरोप (Europe) में हालात सबसे ज्‍यादा खराब हैं. जर्मनी, इटली, स्‍पेन जैसे यूरोपीय देशों ने पाबंदियों के जरिये बहुत हद तक कोरोना वायरस पर काबू पा लिया है. वहीं, यूरोपीय देश बेलारूस (Belarus) ने अब तक संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई है. बता दें कि बेलारूस में अब तक 9,590 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें 67 लोगों की मौत हो चुकी है.

लगातार काम पर जा रहे हैं लोग, खुल रहे रेस्‍टोरेंट-मूवी थियेटर्स

बेलारूस के राष्‍ट्रपति अलेक्जेंडर जी. लुकाशेन्को (Aleksandr G. Lukashenko) ने मार्च के आखिर में एक आइस हॉकी के एमैच्‍योर टूर्नामेंट के दौरान संक्रमण फैलने के सवाल पर गुस्‍से में पूछ लिया था कि कोरोना वायरस कहां है. उन्‍होंने कहा कि बेलारूस में कोई वायरस नहीं है. इसके बाद उन्‍होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि क्‍या आपको कोई वायरस उडता दिख रहा है क्‍या? मुझे तो कोई वायरस नहीं दिख रहा है. ऐसे समय में जब कोरोना वायरस से जूझने के बाद काबू कर चुके जर्मनी और डेनमार्क जैसे यूरोपीय देश बहुत सावधानी के साथ जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, बेलारूस में लोग लगातार काम पर जा रहे हैं. वहां रेस्‍टोरेंट्स, कॉफी शॉप्‍स और मूवी थियेटर पहले की ही तरह खुल रहे हैं. ईस्‍टर के मौके पर चर्चों में भी काफी लोग जुटे थे.


सरकार पर लगे संक्रमितों की असली संख्‍या छुपाने का आरोप

बेलारूस में फुटबाल के पेशेवर खिलाड़ी पूरे जोश में हैं. हालांकि, मैच देखने वालों की तादाद में कमी आ गई है. राजधानी मिंस्‍क के सबवे में काफी संख्‍या में लोग नजर आ रहे हैं. ज्‍यादातर कार्यालय खुल रहे हैं और लोग काम पर जा रहे हैं. हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि आधिकारिक आंकड़े संक्रमितों की वास्‍तविक संख्‍या नहीं दिखा रहे हैं. लोगों का कहना है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हमें ऑफिशियल पॉलिसी को स्‍वीकारा कररना ही होगा. हमारे पास कोई दूसरा विकल्‍प नहीं है. हमारे राष्‍ट्रपति चाहते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था नहीं लड़खड़ानी चाहिए, चाहे कितने ही लोगों की जान चली जाए. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, 32 वर्षीय सिंगल मदर और सेक्रेटरी पॉलिना गालेख ने कहा कि काश मैं घर पर रुक पाती, लेकिन मुझे अपने बच्‍चे भी पालने हैं तो काम तो करना ही होगा.

विपक्ष के नेता पावेल ने कहा, पागल हो गए हैं राष्‍ट्रपति लुकाशेंको
राष्‍ट्रपति लुकाशेंको का कहना है कि देश एक खराब फ्लू सीजन की तरह कोरोना वायरस संकट से बाहर निकल आएगा. साथ ही वह 67 लोगों की मौत के लिए कोरोना वायरस को जिम्‍मेदार नहीं मानाते हैं. वह कहते हैं कि उनकी मौत दूसरे कारणों से हुई है. विपक्ष के नेता पावेल मैरिनिक (Pavel Marinich) ने कहा कि दुनिया हम पर हंस रही है, लेकिन किसी की मौत पर हंसना अच्‍छी बात नहीं है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपति लुकाशेंको पागल हो चुके हैं. लुकाशेंको के खिलाफ 2010 में राष्‍ट्रपति पद का चुनाव लड़ने वाले आंद्रे सैनिकोव (Andrei Sanikov) ने कहा कि जानलेवा वायरस को फैलने से रोकने के लिए लोगों के भीड़ जमा करने पर पाबंदी लगाना सामान्‍य सी बात है. ऐसे घातक वायरस के सामने बेलारूस की प्रतिक्रिया काफी खराब है. अगर लोग ऐसे ही घरों से निकलते रहेंगे और जगह-जगह भीड़ लगाते रहेंगे तो नतीजे बहुत खराब होंगे.

स्वयंसेवी संगठन कर रहे लोगों की मदद, कालाबाजारी भी जारी
बेलारूस में स्‍वयंसेवी संगठन क्राउडफंडिंग के जरिये मेडिकल उपकरण और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट (PPE) खरीदकर मेडिकल वर्कर्स को दे रहे हैं. इस काम में कई एनजीओ और बिजनेसमैन भी मदद कर रहे हैं. बेलारूस के नॉर्थ ईस्ट के एक शहर विटेक्स में लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालात गंभीर बने हुए हैं. वहां बीमारों की तादाद काफी ज्यादा है. वहां काफी संख्या में मेडिकल वर्कर्स भी बीमार हैं. यही नहीं, बेलारूस में मास्क की कालाबाजारी भी हो रही है. एक मास्क 12 पाउंड यानी करीब एक हजार रुपये से ज्यादा का मिल रहा है. स्‍वयंसेवी संगठन वेंटिलेटर्स, प्रोटेक्टिव क्लॉथिंग और दूसरे मेडिकल उपकरण खरीदकर बांट रहे हैं. बेलारूस की आबादी करीब 95 लाख है. हालात से साफ है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए ये देश कतई तैयार नहीं है.

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